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"रंग जो सूख गए"

Jezik HindskiHindski
Knjiga Meki uvez
Nakladnici akash sharma v, kolovoz 2026
रंग जो सूख गए एक संवेदनशील और प्रेरणादायक उपन्यास है, जो एक युवा कलाकार के जीवन की उस भावनात्मक यात्... Cijeli opis
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रंग जो सूख गए एक संवेदनशील और प्रेरणादायक उपन्यास है, जो एक युवा कलाकार के जीवन की उस भावनात्मक यात्रा को प्रस्तुत करता है जहाँ सपने, जिम्मेदारियाँ, रिश्ते और परिस्थितियाँ आमने-सामने खड़े होते हैं।

यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच अपनी पहचान, अपने जुनून और अपने अधूरे सपनों को बचाए रखने का संघर्ष करता है। कला के प्रति प्रेम, रिश्तों की जटिलताएँ, बदलते हालात और आत्म-संघर्ष के बीच यह उपन्यास उस दर्द और उम्मीद को दर्शाता है, जिसे हर वह व्यक्ति महसूस करता है जिसने कभी अपने सपनों को परिस्थितियों के कारण पीछे छोड़ा हो।

"रंग जो सूख गए" केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है जिनके सपने समय की धूल में कहीं खो गए, लेकिन दिल के किसी कोने में आज भी जीवित हैं। यह पुस्तक याद दिलाती है कि भले ही जीवन के कैनवास पर कुछ रंग फीके पड़ जाएँ, लेकिन सच्चे जज़्बात, यादें और सपनों की चमक कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

प्रेम, कला, संघर्ष और आत्म-खोज से भरा यह उपन्यास पाठकों को अपने भीतर छिपे कलाकार और अधूरे सपनों को फिर से महसूस करने की प्रेरणा देता है।

About the Author

राशिद निसार एक भारतीय लेखक और मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जिनका जीवन कला, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति से गहराई से जुड़ा रहा है। बचपन से ही चित्रकला, स्केचिंग और लेखन के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है।

तकनीकी शिक्षा और पेशेवर जीवन की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपने अनुभवों, भावनाओं और जीवन के संघर्षों को शब्दों और रंगों के माध्यम से व्यक्त करने की अपनी रचनात्मक यात्रा जारी रखी।

उनकी पहली पुस्तक "रंग जो सूख गए" सपनों, कला, प्रेम, संघर्ष और आत्म-खोज की एक भावनात्मक यात्रा है। राशिद निसार का

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Informacije o knjizi

Puni naziv "रंग जो सूख गए"
Jezik Hindski
Uvez Knjiga - Meki uvez
Datum izdanja 2026
Broj stranica 122
EAN 9798235301580
Libristo kod 53651606
Nakladnici akash sharma v
Težina 152
Dimenzije 140 x 216 x 7
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