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मैं इस काबिल नहीं था कि कुछ करता या लिखता, लेकिन हर किसी की सफलता का कोई ना कोई राज होता है। लोग कहते हैं कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, मेरा मानना है कि कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है। इसलिए मैंने किया, यानी कि लिखा "बंद लिफ़ाफ़े"। यह मेरा सपना था कि उन सभी लेखकों के सपने साकार करूँ जो प्रतिभाशाली होकर भी अपने लेखन की प्रतिभा को लोगों तक नहीं पहुंचा पा रहे है।मैं उन सभी लोगों को विशेष धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने इस सपने को सच में बदलने में भरपूर मदद की। मैं "बंद लिफ़ाफ़े" के सभी सहलेखकों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिन्होंने अपनी भावनाओं और कला के सभी लिफाफे इस किताब में खोलें है। यह किताब परिणाम है हमारे लेखकों के प्रयास और उनके हर पल साथ का, बिना इनके इस पुस्तक का सफल प्रकाशित होना लगभग असंभव था। हमारी पूरी टीम प्रशंसा की पात्र है, मैं विशेष धन्यवाद देना चाहूँगा हमारी संपादिका शिवी मीणा और टीम समन्वयक आस्था श्रीवास्तव और खुशी काला का।
Dobar dan! Ja sam Libroamiko, vaš književni savjetnik.
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