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"" परिवर्तन ""
दूसरा वॉल्यूम
समरेश जोर से शोर के साथ वापस आता है - डेढ़ से दो सौ मीटर के बीच बम फटने की आवाज।
दो-चार मोटरसाइकिलों ने घोर शोर मचाया और भागने लगे!
कौन जानता है कि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल या मारा गया है - स्थानीय या विदेशी?
लेकिन ऐसा नहीं था, लेकिन यह ""परिवर्तन"" क्यों?
करीब दो दशक पहले गांव के लोगों ने अनजाने में बो दिए बीज- मैं इसका गवाह हूं, यानि समरेश...!
आज से करीब दो दशक पहले... साल्टा 2000-2001
भगवानपुर मौजा के आसपास विशाल ""औद्योगिक पार्क"" धीरे-धीरे विकसित हुआ है।
इस कहानी का मुख्य आधार-भगवानपुर की जीवनी...जिसके सामाजिक-राजनीतिक परिवार-भौगोलिक-प्राकृतिक-सबसे ऊपर मानवीय संबंधों को इस उपन्यास में धीरे-धीरे ""रूपांतरित"" किया गया है, वह है इसकी वास्तविक तस्वीर!
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